दिल्ली हाई कोर्ट ने प्राइवेट स्कूल फीस नियमों पर सरकार से मांगा जवाब, SLFRC सर्कुलर पर उठे सवाल
- By Gaurav --
- Friday, 10 Jul, 2026
Delhi High Court Seeks Government'
नई दिल्ली: दिल्ली के निजी स्कूलों में फीस बढ़ोतरी और नियमन को लेकर जारी विवाद एक बार फिर दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है। अदालत ने शिक्षा निदेशालय (DoE) द्वारा निजी स्कूलों को स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटी (SLFRC) गठित करने संबंधी जारी सर्कुलर पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने निजी स्कूलों की ओर से दायर याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए सरकार को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया। यह याचिकाएं दिल्ली स्कूल एजुकेशन (फीस निर्धारण एवं रेगुलेशन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025 को चुनौती देने वाली मुख्य याचिकाओं का हिस्सा हैं, जिनमें कानून को मनमाना, पक्षपातपूर्ण और दुर्भावनापूर्ण बताया गया है।
'एक्शन कमेटी ऑफ अनएडेड रिकॉग्नाइज्ड प्राइवेट स्कूल्स' की ओर से अदालत से अनुरोध किया गया कि SLFRC का गठन नहीं करने पर स्कूलों के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से उन्हें अंतरिम राहत दी जाए। अदालत ने कहा कि मुख्य मामले की सुनवाई 20 जुलाई को निर्धारित है और यदि उससे पहले सरकार कोई प्रतिकूल कार्रवाई करती है तो याचिकाकर्ता तत्काल अदालत का रुख कर सकते हैं।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हाई कोर्ट पहले ही 1 फरवरी के आदेश पर रोक लगा चुका था, जिसके तहत स्कूलों को SLFRC बनाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद 30 जून को शिक्षा निदेशालय ने समान निर्देशों वाला नया सर्कुलर जारी कर दिया, जिसमें 2026-27 शैक्षणिक सत्र सहित तीन वर्षों के लिए फीस प्रस्ताव जमा करने को कहा गया है।
वहीं, दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने अदालत को बताया कि 28 फरवरी के आदेश में SLFRC के गठन से संबंधित कानूनी प्रावधानों पर पूर्ण रोक नहीं लगाई गई थी। हालांकि, अदालत ने पहले स्पष्ट किया था कि 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए निजी स्कूल पिछले वर्ष के बराबर ही फीस वसूल सकते हैं।
नए कानून के तहत प्रत्येक निजी स्कूल में स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटी (SLFRC) का गठन अनिवार्य है। इस समिति में स्कूल प्रबंधन के प्रतिनिधि, प्राचार्य, तीन शिक्षक, पांच अभिभावक और शिक्षा निदेशालय का एक नामित सदस्य शामिल होगा। समिति स्कूल द्वारा प्रस्तावित फीस की समीक्षा कर 30 दिनों के भीतर निर्णय देगी।